घर के एक कोने में बैठा, निगाहों में वही तीर लिए, यार जो यारी तोलता है, एक आईना जो बोलता है| हर दिन मैं बदल गया, हर हाल में वो ढल गया| वो खुदा की तरह बुलंद है, न हँसता है, न रोता है, एक आईना जो बोलता है| मेरे उसूल खोखले हो गए, सपनों