Category: नज़्म

दरवाज़े सारे बंद हैं

कोई नहीं आएगा यहाँ, इजाज़त नहीं हैं| आज दरवाजे सारे बंद हैं … अंधेरा है ज़हन में, कमरे की रौशनी मद्धम है … आज दरवाजे सारे बंद हैं … मरासिम सारे यहाँ, सर झुका के खड़े हैं| आज इनका सामना मुझसे है| आज ये जवाब देंगे अपने खोखलेपन का … आज दरवाजे सारे बंद हैं

घर का पता

अनजान है रास्ता, मंजिल की साजिशों से| हम हैं की उससे, घर का पता पूछते हैं| उस अंजुमन में कोई नहीं मेरे सिवा, हम हैं के उससे यारों का पता पूछते हैं|

कब आओगे

कब आओगे तुम आवाज़ लेकर, इंतज़ार में, ख़ामोशी शोर करती है| बेचैन हूँ, बेखबर हूँ यहाँ| मिटने का इरादा है, दुनिया ज़ोर करती है|

तुम्हें ज़माने की दुआ चाहिए

तुम और मैं, काफी नहीं है जिंदिगी के लिए, तुम्हें ज़माने की दुआ चाहिए| नादान मैं क्या समझ बैठा तेरे इश्क को, तुम्हें इस रात की सहर चाहिए|

लहरों में बहने वाले

लहरों में बहने वाले, खुद में गुम जाने वाले| तेरी ख़ामोशी को समझते कैसे, हम शोरों में रहने वाले| तुझे वास्ता नहीं दुनिया से, अपनी दुनिया में जीने वाले|

मुझे बदलना होगा

मैं जैसा हूँ उनको गवारा नहीं, मुझे बदलना होगा| अपनी शक्सियत मिटा के, वैसा बनना होगा| मुझे बदलना होगा| पहचान ना आये अक्स आईने में, ऐसा नक़ाब पहनना होगा| मुझे बदलना होगा| उससे भाग के जाऊँगा कहाँ, उसी दामन में समाना होगा| मुझे बदलना होगा| कोई बिखेर दे तुझे हवा में ‘वीर’, तू ज़र्रा ज़र्रा

कौन है वो

सजा ले मेरे नुस्क अपने दामन में, मिटा दे मेरी आवारगी को, कौन है वो… लम्हा लम्हा जो बिछड़ा मुझसे, छीन ले जो उसे वक्त से, कौन है वो… ‘वीर’, इस शोर में सुन ना पाऊँगा उसे, फिर भी आवाज़ दे जो, कौन है वो…

एक और दिन

एक और दिन जीता हूँ, एक और रात मरता हूँ, इंतज़ार में तेरे, और क्या कब करता हूँ| आफ़ताब से जलता हूँ, महताब से पिघलता हूँ, हर लम्हा तेरे बिन, पुर्जों में ढलता हूँ| इंतज़ार में तेरे, और क्या कब करता हूँ| लबों से ख़ामोशी का वादा है मेरा, चेहरे के नकाब से डरता हूँ|

हकीकत

दूं कोई मिसाल, या कोई अफसाना तुमको| कशमकश में है ये दिल, दूं ख्वाब तुम्हे, तो दूं हकीकत किसको| अब सवाल नहीं, के जीके क्या मिला| बेंच आए खुदको उसी बाज़ार में, ये सोचो किसको क्या मिला| मेरे पुर्जे, नज़र आते हैं हर शख्स में, हर मोड़ पे, मैं खुद अपने से मिला| अँधेरे कमरे