Category: नज़्म

इंतज़ार के सलीके

तहज़ीब की किताब में, ऐसा कोई पन्ना नहीं, देखे कोई जख्म-ऐ-दिल, ऐसा कोई चश्मा नहीं| जिसके माने खुद न समझे, समझेंगे वो क्या समझाए किसीके| जवानी-ऐ-रकीब, अभी सिकने है तुम्हे, इंतज़ार के सलीके| न जाने कितने ज़ख्म छुपाये किस दिल ने, यु हीं न जाओ पास किसी के, अभी सिखने है तुम्हे, इंतज़ार के सलीके|

समंदर का खारा पानी

छुपा नहीं सकता, जज्बातों को तहज़ीब का पेहरा| डूब गयी कितनी दास्ताने, ये ज़ख्म है कितना गहरा| कोई टूटे ख्वाब की सदा हो,या बिछड़े प्यार की निशानी| कुछ तो बयां कर रहा है, आपकी आँखों से छलकता, ये समंदर का खारा पानी| अश्क आँखों का खिलौना नहीं, किसी दर्द का बिछौना नहीं| ये बंद पिंजरे

वक़्त कट जाता है

वक़्त कट जाता है, गुन गुनाने में.. सांसों ने मुस्कुरा के कहा मौत से, बस इतना ही दम था, ज़माने में| वक़्त कट जाता है, गुन गुनाने में.. उनसे कहदो, सच और भी कड़वा है, सहम गए हैं जो अफ़साने में| वक़्त कट जाता है, गुन गुनाने में.. कल किसको इल्जाम दोगे ‘वीर’, जवानी गुज़ार

एक ख्याल

उन लम्हों को फिर जिया जाए आज, चुभा था जिसका कांटा, उस गुल को फिर छुआ जाए आज| अपना मुकद्दर हातों में लिए फिरता हूँ, कुछ तकदीरों का मज़ा भी लिया जाए आज| सूख चली हैं ज़िन्दगी की राहें, वक़्त भर चला ज़ख्म, एक अश्क पलकों में छुपा के, बारिशों का मज़ा लिया जाए आज|