कल रात

मिल गयी थी तुम कुछ पलों के लिए,
फिर तुम्हें मैंने खोया था कल रात|

मेरी आँखों में देर तलक बैठा रहा,
वो अश्क भी रोया था कल रात|
फिर तुम्हें मैंने खोया था कल रात…

मलाल मुझ को है जागने का अब भी,
ना उठने को क्यों ना सोया कल रात|

0.00 avg. rating (0% score) - 0 votes
%d bloggers like this: