आदत और ज़रुरत

आदत और ज़रुरत से कुर्बत का गुमान होता है,
मगर इससे कहीं बढ़कर आदमी का ईमान होता है|

घर वो है जिसमें दिलों के रिश्ते पलते हैं,
चार दीवारों और एक छत का बस मकान होता है|

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