आज आपकी कमी बहुत खल रही है

जिंदिगी मजबूरीयों में ढल रही है,
आज आपकी कमी बहुत खल रही है |

आपके रुकसत से ही सब कुछ बदला,
मैं थम गया और दुनिया चल रही है |
आज आपकी कमी बहुत खल रही है…

कोशिशों से हर दिन की सूरत संवारता हूँ,
और स्याह रात आकर कालिक मल रही है |
आज आपकी कमी बहुत खल रही है…

मैं आपके दामन में बहुत महफूज़ था,
अब कितनी मुश्किलें मुझ पर पड़ रही हैं |
आज आपकी कमी बहुत खल रही है…

अनगिनत हादसों का शिकार होता रहा ‘वीर’,
मगर अब भी इंतज़ार की ये लौ जल रही है |

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  • sangeetaswarup

    बहुत खूब

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