आंख आंख बिखरे मयखाने हैं

लहरों में घुले कितने फ़साने हैं,
साहिलों से हमारे रिश्ते पुराने हैं|

हर लहर को खामोश ही पीते रहे,
हम दीवाने थे, अब भी दीवाने हैं|

अब पीने क्यों जायें बता ‘वीर’,
आंख आंख बिखरे मयखाने हैं|

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