आपसे दिलासा कब मांगता है

वीर आपसे दिलासा कब मांगता है,
उसपे जो गुजरी है, वो ही जानता है|

खबर है उसे अपनी काली शक्सियत की,
कुछ सोच कर ही उजालों से दूर भागता है|
वीर आपसे दिलासा कब मांगता है…

तुम हाथ ना लगाओ गहरे ज़ख्मों को,
फिर उभर आयेंगे, वो इन्हें खूब पहचानता है|
वीर आपसे दिलासा कब मांगता है…

उसका दिल टूटा भी है और रूठा भी,
वो दीवाना है, उसका गम से पुराना वास्ता है|
वीर आपसे दिलासा कब मांगता है…

डर गया है अपने माज़ी के सायों से,
सहमा है इसलिए देर तलक जागता है|
वीर आपसे दिलासा कब मांगता है…

फ़िक्र मत कर ए हमनफस तू उसकी,
वो गिरा ज़रूर है मगर संभालना जानता है|

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