अच्छा लगता है…

acha-lagta-hai

तुम से दिल की हर बात कहना अच्छा लगता है,
इस बेगानी दुनिया में तू मुझे अपना लगता है|

तुझ संग गुज़र रही है बहुत आराम से ज़िंदगी,
तुझ बिन फूलों से भरा रास्ता खुदरा लगता है|
तुम से दिल की हर बात कहना अच्छा लगता है…

सादा दिल ही यहाँ होते हैं दाग-दाग,
जिन्हें दूसरे का ग़म भी अपना लगता है|
तुम से दिल की हर बात कहना अच्छा लगता है…

कपड़ों की तरह रोज़ इरादे बदल देते हैं नादां,
जैसे तस्वीर बदलने का इन्हें चसका लगता है|
तुम से दिल की हर बात कहना अच्छा लगता है…

वो कितना तन्हा है.. तुम क्या जानोगे कभी,
वो जो एक शक्स हर किसी को अपना लगता है|
तुम से दिल की हर बात कहना अच्छा लगता है…

आँसू आँखों से बह जायें तो बेहतर है ‘वीर’,
जो बह नहीं पाते उन्हें सूखने में अरसा लगता है|

अच्छा लगता है…
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  • http://kavyana.blogspot.com anamika ghatak

    Bahut hi sundar likha hai apne….Badhia

  • राजेंद्र कुमार

    आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (11.07.2014) को “कन्या-भ्रूण हत्या ” (चर्चा अंक-1671)” पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

  • santosh gupta

    achcha lagta hai .. a beautiful, gazal ! a’nsu …Jo bah nahi paye …suukhne me’n..arsa lagta hai

  • santosh gupta

    aa’nsu ….jo bah nahi paye …suukhne me’n arsaa lagta hai …True .!!