अच्छा लगता है…

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तुम से दिल की हर बात कहना अच्छा लगता है,
इस बेगानी दुनिया में तू मुझे अपना लगता है|

तुझ संग गुज़र रही है बहुत आराम से ज़िंदगी,
तुझ बिन फूलों से भरा रास्ता खुदरा लगता है|
तुम से दिल की हर बात कहना अच्छा लगता है…

सादा दिल ही यहाँ होते हैं दाग-दाग,
जिन्हें दूसरे का ग़म भी अपना लगता है|
तुम से दिल की हर बात कहना अच्छा लगता है…

कपड़ों की तरह रोज़ इरादे बदल देते हैं नादां,
जैसे तस्वीर बदलने का इन्हें चसका लगता है|
तुम से दिल की हर बात कहना अच्छा लगता है…

वो कितना तन्हा है.. तुम क्या जानोगे कभी,
वो जो एक शक्स हर किसी को अपना लगता है|
तुम से दिल की हर बात कहना अच्छा लगता है…

आँसू आँखों से बह जायें तो बेहतर है ‘वीर’,
जो बह नहीं पाते उन्हें सूखने में अरसा लगता है|

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