अक्सर

तहज़ीब निभाया करते हैं वो मुझसे अक्सर,
आईना छुपा लिया करते हैं वो मुझसे अक्सर|

सच के काँटों से मेरा ज़हन कहीं लहू न हो जाए,
मेरा झूठ अपने होटों से लगा लिया करते हैं अक्सर|
आईना छुपा लिया करते हैं वो मुझसे अक्सर…

वो ना आये लौटकर एक अरसा गुज़र गया,
हम शाम ढले फिर भी उन्हें पुकार लिया करते हैं अक्सर|
आईना छुपा लिया करते हैं वो मुझसे अक्सर…

हम भी दाना हुए है तेरी संगत में ‘वीर’,
अश्कों को मुस्कराहट से छुपा लिया करते हैं अक्सर|

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