अंदाज़ मेरा मुझे

अंदाज़ मेरा मुझे बेगाना सा लगने लगा है,
हर ख्याल कोई दुश्मन पुराना सा लगने लगा है|

एक लम्हें में इतनी दूर चला आया हूँ सबसे,
ये दिन भी गुजरा ज़माना सा लगने लगा है|
अंदाज़ मेरा मुझे बेगाना सा लगने लगा है…

अपनी हकीकत इतनी बार पढ़ली हमने ‘वीर’,
अपना किरदार कोई फ़साना सा लगने लगा है|
अंदाज़ मेरा मुझे बेगाना सा लगने लगा है…

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  • Deevasg

    Bahot khoob sahab. Maqta Khoob likha hai..

  • sangeetaswarup

    बहुत खूब 

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