अपना सर उठाने की

अपना सर उठाने की, एक कीमत होती है,
हर किसी को कहाँ नसीब, ये ज़ीनत होती है |

ख्वाब तो हर आँख में होते हैं मगर,
सब में कहाँ इन्हें जीने की नीयत होती है |
अपना सर उठाने की, एक कीमत होती है …

मुश्किल हालत से गुज़रते पथरीले रास्ते,
हर मंजिल कहाँ ये काबलियत होती है |

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  • yashodadigvijay4

    शनिवार 16/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों  का स्वागत है धन्यवाद!

  • sangeetaswarup

    बहुत खूब 

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