आवारा है वो

उथले समुन्दर का फैला किनारा है वो,
शायद मुझ जैसा ही आवारा है वो|

वो होगा बेवफा ज़माने की नज़र में,
मगर मुझे हर हाल में गवारा है वो|

उसे नहीं आरजू किसीसे कोई ‘वीर’,
तन्हा खुद अपना सहारा है वो|

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  • Raghu

    वीर साहब आपकी कलम को मेरा सलाम …
    क्या लिखतें है आप ….
    जो दिल तक छु जाता है …

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