आवाज़ है तेरी

तरसती आँखों को आस है तेरी,
भटकती राहों को तलाश है तेरी|

सबब-ए-फिराक का इल्म नहीं,
कौन सी मजबूरी हमराज़ है तेरी|
भटकती राहों को तलाश है तेरी…

ना समझ मुकद्दर को खुदा,
हर अंजाम की आगाज़ है तेरी|
भटकती राहों को तलाश है तेरी…

ख्वाबों की कीमत सांसों से देने वाले,
जिंदिगी बेंचती है जिसे लाश है तेरी|
भटकती राहों को तलाश है तेरी…

इतरा मत तारीफ-ए-ग़ज़ल पर ‘वीर’,
एहसास उसके हैं बस आवाज़ है तेरी|

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