बस एक पल और

बस एक पल और फिर कुछ नहीं है,
वैसे यह ख्याल उतना भी बुरा नहीं है|

सब मशरूफ रहेंगे अपने बवाल में,
बस भीड़ में एक शख्स अब नहीं है|
वैसे यह ख्याल उतना भी बुरा नहीं है…

कह दो मेरी बंदगी परखने वालों से,
जो उनका खुदा है वो मेरा नहीं है|
वैसे यह ख्याल उतना भी बुरा नहीं है…

मीलों का फासला है दिलों की दूरी का,
तेरे इस जहाँ में कौन तन्हा नहीं है|
वैसे यह ख्याल उतना भी बुरा नहीं है…

वक़्त को इलज़ाम तो दिया है सबने,
जब वो ठहरा है तब आदमी ठहरा नहीं है|
वैसे यह ख्याल उतना भी बुरा नहीं है…

अब ‘वीर’ तू रहने ही दे अपनी बातें,
तू किसका है और कौन तेरा नहीं है|
वैसे यह ख्याल उतना भी बुरा नहीं है…

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