बातों ही बातों में

बातों ही बातों में, कट गयी ज़िन्दगी मेरी,
कितने रिश्तों में, बट गयी ज़िन्दगी मेरी|

अपनी सुध थी ना ज़माने की खबर,
इश्क के बाज़ार में, लुट गयी ज़िन्दगी मेरी|
बातों ही बातों में, कट गयी ज़िन्दगी मेरी…

कुछ वक़्त का तकाज़ा था, कुछ हालात की मजबूरी थी,
हर रोज़ बदल गयी, ये शक्सियत मेरी|
बातों ही बातों में, कट गयी ज़िन्दगी मेरी…

तुझे अपना कहूं तो किस हक से ‘वीर’,
तेरी साँसों ने छीन ली ज़िन्दगी मेरी|
बातों ही बातों में, कट गयी ज़िन्दगी मेरी…

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  • `हर रोज बदलती गई शख्सियत मेरी’

    क्षमा के साथ एक सुझाव है क्या यह पंक्ति ऐसे लिख सकते हैं सिर्फ `बदल’ को `बदलती’ किया है अन्यथा न लें यह एक सुझाव भर है….

    • वीर

      आपके सुझाव के लिए धन्यवाद|
      बदलती सही लफ्ज़ है क्योंकि इससे एक निरंतर बदलाव का पता चलता है!

  • Anil Jaiswal

    Mast

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