बातों ही बातों में

बातों ही बातों में, कट गयी ज़िन्दगी मेरी,
कितने रिश्तों में, बट गयी ज़िन्दगी मेरी|

अपनी सुध थी ना ज़माने की खबर,
इश्क के बाज़ार में, लुट गयी ज़िन्दगी मेरी|
बातों ही बातों में, कट गयी ज़िन्दगी मेरी…

कुछ वक़्त का तकाज़ा था, कुछ हालात की मजबूरी थी,
हर रोज़ बदल गयी, ये शक्सियत मेरी|
बातों ही बातों में, कट गयी ज़िन्दगी मेरी…

तुझे अपना कहूं तो किस हक से ‘वीर’,
तेरी साँसों ने छीन ली ज़िन्दगी मेरी|
बातों ही बातों में, कट गयी ज़िन्दगी मेरी…

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