बेगाना हुआ शम्मा से

बेगाना हुआ शम्मा से तो क्या जी पाऊँगा,
और यूँ ही उस पर मरता रहा तो मर ही जाऊँगा|

क़ज़ा आये तो आये जाम गुलाबी ले कर वीर,
कोई तबिअत से पिलाये तो मैं ज़हर भी पी जाऊँगा|
और यूँ ही उस पर मरता रहा तो मर ही जाऊँगा …

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