बेरुखी-ऐ-गुल

उसके प्यार का अंदाज़ समझिये.
बेरुखी-ऐ-गुल का राज़ समझिये|

उस गुल को खौफ है अपने काँटों का,
उसकी ख़ामोशी की आवाज़ समझिये|
बेरुखी-ऐ-गुल का राज़ समझिये…

जिंदगी जीने का सदा सा फलसफा है,
कल से मुख्तलिफ अपना आज समझिये|
बेरुखी-ऐ-गुल का राज़ समझिये…

मेरे होने तक एक पहेली ही रहेगी,
मेरी जीस्त का मसला मेरे बाद समझिये|
बेरुखी-ऐ-गुल का राज़ समझिये…

सच हकीकत से घिरा है ‘वीर’,
अंजाम को एक नया आगाज़ समझिये|
बेरुखी-ऐ-गुल का राज़ समझिये…

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