चल यूँ कर लें

दिखाई दे हर शय में तुझे,
उसे ऐसे आँखों में भर लें|

महकता रहे ज़हन हमेशा,
उसे ऐसे सांसों में भर लें|

कुछ ना रहे माज़ी का बाकी,
उसे ऐसे यादों में भर लें|

सिर्फ एक लकीर हो किस्मत की,
उसे ऐसे हाथों में भर लें|

हर लफ्ज़ में घुल जाए ज़िक्र,
उसे ऐसे बातों में भर लें|

काली गुमसुम तन्हा ना बीते,
उसे ऐसे रातों में भर लें|

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  • बहुत सुंदर रचना

    • “सिर्फ एक लकीर हो किस्मत की,
      उसे ऐसे हाथों में भर लें|

      हर लफ्ज़ में घुल जाए ज़िक्र
      उसे ऐसे बातों में भर लें”

      bahut hi sundar…..
      shubhkaamnaaye swikaar kare..

  • nupur

    finally got here! But this reads like the inbox of my cell!!!
    Im amazed at the alacrity with which you spin words together like a wordsmith maybe…

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