छोड़ दिया है

chhodh-diya-hai

अब हमने धक्का देना छोड़ दिया है!
रिश्तों को कांधों पर ढोना छोड़ दिया है |

या हम दाना हुए या तुम में वो बात नहीं,
या इश्क ने ही जादू टोना छोड़ दिया है |
रिश्तों को कांधों पर ढोना छोड़ दिया है…

कोई पूछे तो अब भी तेरा ही नाम लेते हैं,
मुद्दत हुई वो शहर वो कोना छोड़ दिया है |
रिश्तों को कांधों पर ढोना छोड़ दिया है…

खुद में सिमटा हुआ बहुत खुश हूँ मैं,
अपनी तनहाइयों पर रोना छोड़ दिया है |
रिश्तों को कांधों पर ढोना छोड़ दिया है…

कोई जूनून सा आँखों में लिए फिरता हूँ,
दिन में जागना रात को सोना छोड़ दिया है |
रिश्तों को कांधों पर ढोना छोड़ दिया है…

नरम बिस्तर पर नींद मिलती है सुकून नहीं,
फिर भी बेटों ने माँ का बिछोना छोड़ दिया है |
रिश्तों को कांधों पर ढोना छोड़ दिया है…

बेहिचक बेपरवाह बेतकलुफ़ बहने लगती हैं,
जैसे आँखों ने मोती पिरोना छोड़ दिया है |
रिश्तों को कांधों पर ढोना छोड़ दिया है…

फसल दर फसल मायूसी ही हाथ लगी ‘वीर’,
तो अब हमने सपने बोना छोड़ दिया है |
रिश्तों को कांधों पर ढोना छोड़ दिया है…

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