दरिया दिया और प्यासे रहे

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Photo by frankieleon

दरिया दिया और प्यासे रहे,
उम्र भर साथ अपने दिलासे रहे।

जो थे वैसा रहने न दिया,
न सोना बने, न कांसे रहे।

कब टिकती है अपने कहे पर,
ज़ुबां ए जीस्त पर झांसे रहे।

मुद्दतों कायम रहा अपना डेरा,
हम जहाँ भी रहे, अच्छे खासे रहे।

मुझमें क्या कुछ न बदला ‘वीर’,
मगर ग़ैरों के इलज़ाम बासे रहे।

दरिया दिया और प्यासे रहे
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