एक आग है मेरे अंदर

बस खामोश हूँ मगर बेज़ुबां नहीं हूँ,
एक आग है मेरे अंदर सिर्फ धुआं नहीं हूँ |

पत्थर की लकीर नहीं हैं उसूल मेरे,
दिल रखता हूँ, गुलाम ए इमां नहीं हूँ |
एक आग है मेरे अंदर सिर्फ धुआं नहीं हूँ…

वक्त आने पर बता देंगे कूबत क्या है,
काबलियत से वाकिफ हूँ, बदगुमां नहीं हूँ |
एक आग है मेरे अंदर सिर्फ धुआं नहीं हूँ…

डूबता जाता हूँ ज़हन के गहरे समंदर में,
लहरों में उलझा हूँ, परेशां नहीं हूँ |

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