एक-एक रुपया मेरी जेब का

न खैरात में मिला है, न वसीयत काम आई है,
एक-एक रुपया मेरी जेब का, गाढ़े पसीने की कमाई है|

न शागिर्दी है मिजाज़ में, न बेपनाह हुनर है कोई,
मैंने ठोकरें खा-खा कर, अपनी रह बनाई है|
एक-एक रुपया मेरी जेब का, गाढ़े पसीने की कमाई है…

मेरे पैराहन से खुशबू आती है मेरे पसीने की,
मेरे हाथ औज़ार हैं, मैंने मेहनत से शक्सियत सजाई है|
एक-एक रुपया मेरी जेब का, गाढ़े पसीने की कमाई है…

हासिल हुआ है बहुत कुछ, मगर कुछ आसानी से नहीं,
मैंने हर मकाम की जिंदिगी से कीमत चुकाई है|
एक-एक रुपया मेरी जेब का, गाढ़े पसीने की कमाई है…

वो और हैं जिनको मिला है बहुत कुछ किस्मत से,
मैंने हाथों को कुरेदा है तब अपनी तकदीर बनाई है|
एक-एक रुपया मेरी जेब का, गाढ़े पसीने की कमाई है…

मेरी आँखों में झलकता है मेरा होसला ‘वीर’,
मेरी तबियत में एक गज़ब की गहराई है|
एक-एक रुपया मेरी जेब का, गाढ़े पसीने की कमाई है…

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  •  DevilPoonam shukriya 🙂

  • Deevasg

    Bahut badhiya sahab!! 🙂
     

  • shaileshtr

    Wah Wah Sir!

  • ankitaraichouksey

    SUPERLIKE

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