एक फासला ऐसा भी है

कोई मुझ जैसा भी है,
कोई तुझ जैसा भी है|

बस एक हाथ कि दूरी,
एक फासला ऐसा भी है|

कभी रुक जाता है थम के,
कभी दरिया सा बहता भी है|
एक फासला ऐसा भी है…

कभी बुलंद होसलों सा बढता,
कभी मायूस बैठा भी है|
एक फासला ऐसा भी है…

देखता रहेगा क्या मुझे वो बस,
क्या कभी कुछ कहता भी है|
एक फासला ऐसा भी है…

ये कैसी तन्हाई है ‘वीर’ बता,
जिसमे कोई रहता भी है|
एक फासला ऐसा भी है…

हैं एक ही सिक्के के दो चेहरे ‘वीर’,
तू थोडा ऐसा भी है, तू थोडा वैसा भी है|

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