फ़िराक से पहले

lambe-firaaq-se-pehle

आखरी वस्ल था लंबे फिराक से पहले,
दोनों खामोश थे दिल-ए-बेबाक से पहले |

अब के जो फूँक से उड़ा देते हो मुझे,
मैं जो शोला था मुश्त-ए-ख़ाक से पहले |
आखरी वस्ल था लंबे फिराक से पहले…

पहचान नहीं पाता हूँ इस दिल को मैं,
ये जो गुलिस्तां था हज़ारों चाक से पहले |
आखरी वस्ल था लंबे फिराक से पहले…

जो दिल चाहे करवा लिजीये हमसे दिन भर,
आदमी काम के हैं, शाम की खुराक से पहले |
आखरी वस्ल था लंबे फिराक से पहले…

पथरा गई हैं जो अब दर पर टंगे हुए,
कितनी जिंदा थी वो आंखें मेरी ताक से पहले |
आखरी वस्ल था लंबे फिराक से पहले…

कभी मेरी बहुत अच्छी दोस्त हुआ करती थी,
जिंदिगी रास आती थी उसके भद्दे मज़ाक से पहले |
आखरी वस्ल था लंबे फिराक से पहले…

खैर अब ये गम तो उम्र भर रहेगा ‘वीर’,
वो मिला क्यों नहीं मुझे इत्तेफाक से पहले |

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