गिला छोटा सा है मगर

इस रुसवाई में दर्द कम और सीख ज़्यादा है,
गिला छोटा सा है मगर टीस ज़्यादा है|

उसका होने की ख्वाइश है मुझे क्यों,
जो मोहब्बत का कम और अपना मुरीद ज़्यादा है|
गिला छोटा सा है मगर टीस ज़्यादा है…

खैर वक्त के साथ मैं संभल ही जाऊँगा,
अभी चोट नई है और अभी उम्मीद ज़्यादा है|
गिला छोटा सा है मगर टीस ज़्यादा है…

जब चाहे गले लगाया, जब चाहा छोड़ दिया,
‘वीर’ ये मोहब्बत कम और भीख ज़्यादा है|
गिला छोटा सा है मगर टीस ज़्यादा है…

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