गम हमारे खुशी अपनी

क्यों लिखते हैं बेखुदी अपनी,
हैं गम हमारे खुशी अपनी|

आईने से नाराज़ हैं हम,
है खुदसे बेरुखी अपनी|

कोई पूछे मंजिल तो क्या कहें,
आवारा कर गयी बेसुधी अपनी|

कौन हैं हालात का जवाबदार,
हैं हम और है बेबसी अपनी|

मिलो सबसे मुस्कुराकर ‘वीर’,
ज़माना देख ले जिंदादिली अपनी|

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  • संगीता पुरी

    बहुत बढिया रचना !!

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