गुज़रा

ये दिन भी कुछ अजीब गुज़रा,
कभी तुमसे दूर कभी करीब गुज़रा|

तेरे मेरे रास्ते यूँ टकराये अक्सर,
तेरे हाथों से निकलकर मेरा नसीब गुज़रा|

उसने भी सर झुका कर तसलीम किया,
मेरे होसलों से मिलकर जब रकीब गुज़रा|

वो पहले सी बात न थी किसी लम्हें में,
तेरे बिन जो गुज़रा.. वक्त अजीब गुज़रा|

निकलता था राह ए इश्क में सर उठा कर,
जो तेरी गली से मुंह छुपाये वो गरीब गुज़रा|

5.00 avg. rating (79% score) - 1 vote
%d bloggers like this: