हमारे कस्बों की बात ही निराली है

चमकते शहर की सीरत ही काली है,
हमारे कस्बों की बात ही निराली है|

दीवाने से हम उलझ गए रौशनी से,
परवानों से हमने जिंदगी हारी है|
हमारे कस्बों की बात ही निराली है…

उन दीयों की लौ का नूर है आँखों में,
हमारे घरों में आज दिवाली है|
हमारे कस्बों की बात ही निराली है…

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