हर कदम पे एक रिश्ता

हर कदम पर एक रिश्ता बिछड़ गया मुझसे|
तेरी कोई खता नहीं, कोई गिला नहीं तुझसे|

इस बगिया को सजाया मैंने ही नहीं,
जुदा ना हुई कभी आवारगी मुझसे|

कोई तेरा नहीं इस दुनिया में ‘वीर’,
इस ख्याल को ज़ब्त किसने किया तुझसे|

0.00 avg. rating (0% score) - 0 votes