हर शक्स के हाथ में कटोरा है!

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हर शक्स के हाथ में कटोरा है,
जिसके पास जितना है.. थोड़ा है|

सांस – सांस मुजरिम बनी है,
मेरी हर सांस ने मुझे तोड़ा है|
हर शक्स के हाथ में कटोरा है…

हसरत ए ख़ुशी में भागता है वहशी,
आदमी.. आदमी कहाँ है? घोड़ा है!
हर शक्स के हाथ में कटोरा है…

मुझसे मांग रहा है इकबाल ए जुर्म,
मुंसिफ न मेरा हाथ मरोड़ा है|
हर शक्स के हाथ में कटोरा है…

माँ – बाप से न पूछ उम्र का हासिल,
पेट काट काट कर उन्होंने तुझे जोड़ा है|
हर शक्स के हाथ में कटोरा है…

हर्फ़ – हर्फ़ उड़ता जाता है कागज़ से,
तेरे नाम के बिना सब कोरा है|
हर शक्स के हाथ में कटोरा है…

मेरे गुनाहों का तू ही हिसाब कर ‘वीर’,
मैंने हर फैसला तुझ पर छोड़ा है|
हर शक्स के हाथ में कटोरा है…

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