हश्र-ए-जवानी

अश्कों से दामन पानी-पानी हुआ,
देखिये क्या हश्र-ए-जवानी हुआ|

मेरे रहते तो सब हकीकत था,
मेरे बाद किस्सा कहानी हुआ|
देखिये क्या हश्र-ए-जवानी हुआ…

तुमसे ही था काबिल-ए-बर्दाश्त,
तुम नहीं तो सौदा बेमानी हुआ|
देखिये क्या हश्र-ए-जवानी हुआ…

दर्द का सिलसिला कब टूटता,
निजात कज़ा की मेहरबानी हुआ|
देखिये क्या हश्र-ए-जवानी हुआ…

इलज़ाम क्या दें वफ़ा को ‘वीर’,
जो हुआ दिल-ए-नादानी हुआ|
देखिये क्या हश्र-ए-जवानी हुआ…

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  • Riyaz

    Aaj Se Aap Mere Guru Or me Aap Shisya,
    Or Isse Zyada Or Kya Kahun

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