हिसाब

आओ हिसाब साफ़ कर लें,
खुदको खुदसे पास कर लें|

सच बोलना महंगा था सनम,
एक दुसरे के झूठ माफ कर लें|

नज़र आयें वैसे जैसे हैं हम दोनों,
ईमान अपना  पाक कर लें|

मैं बसा लूं आपको सीने में,
आप गिराके ज़ुल्फ़ को रात कर लें|

क्यों रहें हम पर्दों में ‘वीर’,
आओ दिल से दिल के बात कर लें|

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  • bahut khoob
    bandhai swikarenn

  • sundar jazbaat

  • Chandrama

    The thought of unwinding often sounds very comforting but when I see it through your words I am not sure if it really is. Keep writing, your words breathe!

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