हम खामोश रहते हैं

ना जाने कैसी रंगत लाए हुनर अपना,
हम खामोश रहते हैं, दुहाई नहीं देते|

हाकिम को मेरे ज़ख्म दिखाई नहीं देते,
इसलिए हम इल्ज़ामों पर सफाई नहीं देते|
हम खामोश रहते हैं, दुहाई नहीं देते…

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