हम खुद के साथ खेले बहुत हैं

सवालों और जवाबों के घेरे बहुत हैं,
हम खुद के साथ खेले बहुत हैं|

हमें किसी महफिल की आरजू नहीं,
हमारे दश्त-ऐ-तन्हाई में मेले बहुत हैं|
हम खुद के साथ खेले बहुत हैं…

बुरा क्या गर वहमों में गुज़रे जिंदगी,
सच कहने और सुनने के झमेले बहुत हैं|
हम खुद के साथ खेले बहुत हैं…

माना के तनहा जीना हमने सीख लिया,
मगर बिन तुम्हारे हम अकेले बहुत हैं|
हम खुद के साथ खेले बहुत हैं…

चिराग-ऐ-मोहब्बत को जलाए रख ‘वीर’,
तेरी राह-ऐ-ज़ीस्त में अँधेरे बहुत हैं|
हम खुद के साथ खेले बहुत हैं…

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  • bahut hi sundar tarike se pyar ko samjhaya hai….umda

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