इलज़ाम तूफानों पर आता रहा

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मैं दिल का गुबार उड़ाता रहा,
इलज़ाम तूफानों पर आता रहा|

मैं छोड़ आया वो शहर ए वफ़ा,
वो गली.. वो मोहल्ला बुलाता रहा|
इलज़ाम तूफानों पर आता रहा…

मुद्दत हो गयी उसको टूटे हुए,
वो ख्वाब मगर.. जगाता रहा|
इलज़ाम तूफानों पर आता रहा…

उसका छुपाने का हुनर देखिये,
वक़्त ए रुखसत भी मुस्कुराता रहा|
इलज़ाम तूफानों पर आता रहा…

मैं भी जिद का पक्का निकला,
वो तोड़ता रहा.. मैं बनाता रहा|
इलज़ाम तूफानों पर आता रहा…

किसी मदारी सा है खुदा मेरा,
मैं नाचता रहा.. वो नचाता रहा|
इलज़ाम तूफानों पर आता रहा…

उस सादगी का तरन्नुम ऐसा था,
उसे उम्र भर मैं गुनगुनाता रहा|
इलज़ाम तूफानों पर आता रहा…

कहीं रुका ही नहीं थम कर ‘वीर’,
कभी आता रहा.. कभी जाता रहा|

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