इश्क बेताब था

उसकी नजर-ऐ-करम हम पर थी,
हुस्न लापरवाह था और इश्क बेताब था|

एक सवाल को घेरे, एक जवाब था,
एक शीशे में जिंदगी, एक आईने में ख्वाब था|

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