जाने क्या पाना चाहता है

जाने कहाँ जाना चाहता है,
जाने क्या पाना चाहता है|

क्यों रखता है उम्मीद फिर,
क्यों चोट खाना चाहता है|
जाने क्या पाना चाहता है…

थोड़ा अँधेरा ही रहने दे आज,
क्यों घर जलाना चाहता है|
जाने क्या पाना चाहता है…

क्यों मुर्दों सा जीता है ‘वीर’,
क्यों मर जाना चाहता है|

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