जब कभी तू मुझे बहूत याद आता है

मेरा अक्स मेरे साये में मिल जाता है,
जब कभी तू मुझे बहुत याद आता है|

इन्तहा है या सज़ा-ऐ-वफ़ा हमनफस,
मुझे हर शय में तू नज़र आता है|
जब कभी तू मुझे बहुत याद आता है…

मैं ज़हर पीना तो छोड़ दूं दोस्त मेरे,
मगर शाम तलक दिल भर जाता है|
जब कभी तू मुझे बहुत याद आता है…

कभी लगता है तू भी रकीबों जैसा,
कोई क्या भला अपनों को यूँ तड़पाता है|
जब कभी तू मुझे बहुत याद आता है..

रख सँभाल कर अगला कदम ‘वीर’,
बादल का क्या है बादल पिघल जाता है|
जब कभी तू मुझे बहुत याद आता है…

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