जला हुआ सा

कुछ अन्दर दबा हुआ सा,
कुछ हलक में फंसा हुआ सा|

सिर्फ धुआँ है आँखों के आगे,
खामोश दिल है बुझा हुआ सा|

इतनी काली है ज़हन की दीवारें,
ना जाने क्या कुछ जला हुआ सा|

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