जवां हो जाने की

आहिस्ता रख ज़ख्मों पर हाथ सनम,
इनकी तासीर है जवां हो जाने की|

शमा-ए-मोहब्बत ना रहेगी उम्र भर,
इसकी किस्मत है धुआं हो जाने की|
इनकी तासीर है जवां हो जाने की..

हर वक्त क्या ढूँढता है लोगों में तू,
तुझे बिमारी है गुमां हो जाने की|
इनकी तासीर है जवां हो जाने की…

मत कर महसूस इतना हर बात को ‘वीर’,
गिलों की आदत है जमा हो जाने की|
इनकी तासीर है जवां हो जाने की…

कौन कब तलक संभालेगा तुझे ‘वीर’,
तेरी फितरत ही है फना हो जाने की|
इनकी तासीर है जवां हो जाने की…

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  • वीर जी…वाह…
    नीरज

  • वाह बहुत सुन्दर.

  • बहुत संजीदगी से लिखी खूबसूरत रचना

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