जो मेरा हौसला है और मेरा डर भी

एक ही जज़्बे के दो पहलु हैं ‘वीर’,
जो मेरा हौसला है और मेरा डर भी|

बंदगी के मायने समझें कैसे ‘वीर’,
वो मेरी जिंदगी है और मेरा रब भी|
जो मेरा हौसला है और मेरा डर भी…

मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर ‘वीर’,
मेरी इल्तिजा है और मेरा हक भी|
जो मेरा हौसला है और मेरा डर भी…

‘वीर’ होने की सज़ा ना दे मुझे,
ये मेरी किस्मत है और मेरा सच भी|
जो मेरा हौसला है और मेरा डर भी…

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