काफिर की दुआ

किसी काफिर की दुआ हूँ मैं,
धुएं सा बुझ चला हूँ मैं|

मेरा नाम पुकारता नहीं कोई,
ख़ामोशी की सदा हूँ मैं|
धुएं सा बुझ चला हूँ मैं…

रख मुझसे दूरी ही तू,
बेखुदी की बला हूँ मैं|
धुएं सा बुझ चला हूँ मैं…

दिन में पिघलता आसमान,
हर शाम तुझ में ढला हूँ मैं|
धुएं सा बुझ चला हूँ मैं…

पी जाऊँ ना कहीं तुझे शराब सा,
मर मर के जीने की अदा हूँ मैं|

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