के मैं रास्तों का ही हो गया

चलता गया यूं रास्तों पर उम्र भर,
के मैं रास्तों का ही हो गया|

कोई नहीं आता है लौट के वहाँ से,
अब जो मैं गया तो गया|
के मैं रास्तों का ही हो गया..

मोहब्बत थी कहीं दफन उसमे,
दो आंसू मेरी मज़ार पर रो गया|
के मैं रास्तों का ही हो गया..

तुम जो ना आये मेरी मय्यत पे भी,
मैं भी अपना कफ़न ओढ़ सो गया|
के मैं रास्तों का ही हो गया..

तेरी खुशबू ना मिल सकी ‘वीर’ उसे,
कुछ गुलों को रखके मायूस वो गया|

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