खाली हाथों में

खाली हाथों में सिर्फ लकीरें न देख,
मेरा होसला भी देख, सिर्फ तकदीरें न देख|

कुछ कर गुज़रने के तलब खत्म नहीं हुई,
मेरे अंदर की आग देख, पैरों की जंजीरें न देख|
खाली हाथों में सिर्फ लकीरें न देख…

चला आता है मुझ तक मुश्किलों का काफिला,
मेरे उसूलों की ज़मीन देख, ज़माने की नफरतें न देख|
खाली हाथों में सिर्फ लकीरें न देख…

ये तू जानता है के मैं अब भी तेरा हूँ ‘वीर’,
मेरी मोहब्बत देख, उन गैरों की कुर्बतें न देख|

खाली हाथों में
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