खींच लाया हूँ

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समंदर से समंदर तक खींच लाया हूँ,
तन्हा साहिल को अंदर तक खींच लाया हूँ|

मैंने खुद जलाया है अपनी कई हसरतों को,
एक सिकंदर को कलंदर तक खींच लाया हूँ|
तन्हा साहिल को अंदर तक खींच लाया हूँ…

तिनका – तिनका रोज़ उछालता हूँ गुबार उसका,
ज़मीं के सितारों को अंबर तक खींच लाया हूँ|
तन्हा साहिल को अंदर तक खींच लाया हूँ…

न देख पाया जब उसे (खुदा) हर शय में वो,
तब मैं निगहों को मंज़र तक खींच लाया हूँ|

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