ख्वाब है मगर

ये मोड़ भी आया है इबादत-ए-इश्क में,
ख्वाब है मगर उसकी तामीर दुआओं में नहीं|

जिंदगी का सबका अपना ही तजुर्बा है,
इस को जीने का हुनर किताबों में नहीं|
ख्वाब है मगर उसकी तामीर दुआओं में नहीं…

तुमने भी महसूस तो की होगी कभी,
जो कसक ख़ामोशी में है सदाओं में नहीं|
ख्वाब है मगर उसकी तामीर दुआओं में नहीं…

मोहब्बत रहेगी जिंदा हमारे बाद भी ‘वीर’,
इसकी सांस क़ज़ा की पनाहों में नहीं|
ख्वाब है मगर उसकी तामीर दुआओं में नहीं…

0.00 avg. rating (0% score) - 0 votes
%d bloggers like this: