किस मसीहा को बचाया जाए

काहिये आज किस मसले को सुलझाया जाए,
किस कातिल को सज़ा दें, किस मसीहा को बचाया जाए|

रात भर थक कर सोया है महताब सहर को,
दिन के उजालों में उसे ना जगाया जाए|
कहिये आज किस मसले को सुलझाया जाए…

हमारे हबीबों में यूँ तो दानाई बहुत हैं,
बात करें उनसे दिल की या खुदको समझाया जाए|
कहिये आज किस मसले को सुलझाया जाए…

याद आते  हैं कई गुज़रे हुए हादसे हमें,
किसको भूल जाएँ हम, किसका चारागर बुलाया जाए|
कहिये आज किस मसले को सुलझाया जाए…

नज़र का एक फरेब है सारा ज़माना ‘वीर’,
जो तन्हा नहीं हो ऐसा एक शख्स बुलाया जाए|
कहिये आज किस मसले को सुलझाया जाए…

कोई ग़ज़ल सुनो या लिख ही डालो कुछ,
इस दिल-ए-बेचैन को यूँ ही बहलाया जाए|
कहिये आज किस मसले को सुलझाया जाए…

अब हाथ हमने उठा तो लिए हैं ‘वीर’,
सवाल के, मांगे दुआ या खंजर उठाया जाए|
कहिये आज किस मसले को सुलझाया जाए…

0.00 avg. rating (0% score) - 0 votes
  • रघू

    वीर जी बहुत दिनों बाद आपको पढ़ने का मोका लगा .
    मेरे मेल बॉक्स में वर्षों बाद अओकी ये रचना आई है …
    हमारे हबीबों में यूँ तो दानाई बहुत हैं,
    बात करें उनसे दिल की या खुदको समझाया जाए|
    कहिये आज किस मसले को सुलझाया जाए…

    याद आते हैं कई गुज़रे हुए हादसे हमें,
    किसको भूल जाएँ हम, किसका चारागर बुलाया जाए|
    कहिये आज किस मसले को सुलझाया जाए…

    सुहान अल्लाह … क्या कहने है आपने वीर जी वाह वाह !!

%d bloggers like this: