किसी और का था

जिसे देखते थे आईने में,
वो अक्स किसी और का था|
मुझ सा दिखता तो था मगर,
वो शख्स किसी और का था|

मेरे पाँव थिरकते रहे,
बदलते हालातों के सुर में|
मैं वहाँ मौजूद तो था मगर,
वो रक्स किसी और का था|

हम तो अनजान थे,
के रास्ते ले जाएंगे कहाँ|
हम सिर्फ मुसाफिर थे ‘वीर’,
ये नक्श किसी और का था|

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