किताब बना लूँ

कुछ बिखरे तन्हा ख्याल उठा लूँ,
पन्ना पन्ना जोड़ कर किताब बना लूँ|

रख लूँ बूंद बूंद अश्क संभाल कर,
कभी इनसे सुलगते सवाल बुझा लूँ|
पन्ना पन्ना जोड़ कर किताब बना लूँ …

नहीं मौत मेरे कब्ज़े में तो क्या,
आ तुझे मैं अपनी साँस बना लूँ|
पन्ना पन्ना जोड़ कर किताब बना लूँ …

तू रख मेरी वफ़ा का भरम,
जिंदिगी को मैं इंतज़ार बना लूँ|
पन्ना पन्ना जोड़ कर किताब बना लूँ …

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